आज आरक्षण चतुर लोगों का सत्ता पाने का हथियार है। जो लागू सद्भावना से हुआ था पर सत्ता पर काबिज होने का जरिया बन गया है।

आज आरक्षण चतुर लोगों का सत्ता पाने का हथियार है। जो लागू सद्भावना से हुआ था पर सत्ता पर काबिज होने का जरिया बन गया है।

सम्पादकीय-: सुधीर शुक्ला

 

सुधीर के बोल : भारत मे आज़ादी के बाद आरक्षण बहुत बड़ा मुद्दा रहा है। संविधान में आरक्षण का प्रारूप वंचितों को बराबरी का अवसर मिले इस विचार से तत्कालीन समयबद्ध व्यवस्था की गई।

आप देश प्रेम के लिये कितने ही फ़िल्म व गाने बना लें या थोती बातें कर लें परन्तु देश में भेदभावपूर्ण नियम से कभी देश-प्रेम जनता में नहीं पनप सकता। चाहें वह कॉलेज हो चाहें वह कार्यलय हो चाहे वह हॉस्पिटल हो, वह सारे कर्म स्थल जहाँ समान नीति लागू न हो। वहा देश प्रेम की भावना मिथ्या होगी।

आज सेना में आरक्षण लागू कर दिया जाए दावा है 6 माह में देश गुलाम हो जाएगा, गृह युद्ध से प्रारंभ हो कर गुलामी की ओर अग्रसर हो जायेगा।

आरक्षण किसी जाति के पक्ष व विपक्ष में नहीं है। यह केवल गरीबों के विरूद्ध है चाहे वह किसी भी जाति का हो अथवा धर्म का क्यों न हो।

जातिगत आरक्षण को सही ठहराने के लिये दलील दी जाती है की पूर्व में दलितों पर अत्याचार बहुत हुआ है, इसलिये तथाकथित उच्च जातियों के योग्य समुदाय पर अत्याचार किया जाना चाहिये, इस आधार पर हत्या, बलात्कार, चोरी, आदि सारे आपराधिक मामलों में बदले की भावना वाले कानून बना देने चाहिये दादा ने हत्या की हो तो नाती को सज़ा होनी चाहिये। क्योंकि आरक्षण का आधार यही दिया जाता है कि सवर्ण जाति के पूर्वजो ने दलितों को अधिकार से वंचित रखा था अतः उनके प्रतिभा शाली बच्चों को जाति के आधार पर मौके नही मिलेंगे।

सर्व साधारण को ज्ञात है आज आरक्षण चतुर लोगों का सत्ता पाने का हथियार है। जो लागू सद्भावना से हुआ था पर सत्ता पर काबिज होने का जरिया बन गया है। देश का दुर्भाग्य है जिसका विकृत रूप से बी पी सिंह ने सत्ता पाने के लिये किया और आज तक बदसूरत चालू है।

1950 से आज तक कोई भी सरकार यह साहस नही कर पायी की आरक्षण से कितने लोगों को किस तरह का लाभ हुआ उसका सर्वे कर जांच करा लें। उच्चतम न्यायालय के आग्रह के पश्चात भी वर्तमान मोदी सरकार ने आग्रह की उपेक्षा कर SC/ST संसोधन संसद में लाना और सवर्ण को 10% आरक्षण देना राजनेतिक मोल भाव नहीं माना जाना चाहिये? जो भाजपा को लाभ दे सकता है परन्तु देश हित के विरूद्ध है। फिर पूर्ववर्ती सरकारों में और मोदी सरकार में क्या अंतर है?

निःसन्देह कॉग्रेस में निम्न सोच के व्यक्तियों के बहुमत के कारण आज वह हाशिये पर है परन्तु मोदी सरकार भी बोट की राजनीति के चलते तथ्यहीन संसोधन नहीं किया है?

क्या देशवासियों में आपस में वेमन्यस्ता बढ़ाने का कारण यह मोदी सरकार भी नहीं है?

नोट बंदी के बजाय जाति आरक्षण के स्थान पर आर्थिक आरक्षण लागू करना चाहिये था जिसके तत्काल सुखद परिणाम होते। पर यह सरकार देश हित करने में चूक रही है।

इतिहास साक्षी है जब जब कोई भी राष्ट्र योग्यता को अपमानित करता है वह अधोगति को प्राप्त होता है और भारत का सविधान तो थोक के भाव में जातियो के आधार पर योग्यताओं को अपमानित कर पिछड़ रहा है।

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