मोदी सरकार को पुरानी नीति को तिलांजलि दे अब एकदम नयी आर्थिक नीति अपनानी होगी। आयत कर लगाने से देश के छोटे और लघु उद्योगों में प्रतिस्पर्द्धा करने की ताक़त बढ़ेगी।

मोदी सरकार को पुरानी नीति को तिलांजलि दे अब एकदम नयी आर्थिक नीति अपनानी होगी। आयत कर लगाने से देश के छोटे और लघु उद्योगों में प्रतिस्पर्द्धा करने की ताक़त बढ़ेगी।

सुधीर के बोल :- भारत की निरन्तर आर्थिक हालात गिरती जा रही है पर राजनेतिक तौर पर कही चर्चा नहीं हो रही है, यह उसी प्रकार है एक चतुर व्यापारी गंजे व्यक्ति को कंघी बेचने जैसा है अर्थात आपको आपकी आवश्यकता विपरीत दूसरी तरफ ध्यान को व्यस्त कर देना।

देश मोदी 2 का पहला आम बजट आने वाला है, आम बजट से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने शीर्ष अर्थशास्त्रियों और उद्योग जगत के दिग्गजों के साथ बैठक की।

इससे यह साफ हो जाता है कि लगातार मंदी को नकारने का नजरिया बदला है।

पूर्व वित्तमंत्री जेटली के दिशानिर्देश में आर्थिक दो फैसले नोटबन्दी, व जीएसटी के दुष्परिणाम में से अभी भी जीएसटी में सुधार का मौका है। वर्तमान वित्तमंत्री सीतारमन स्थितियों को गहराई से समझने की योग्यता रखती है परंतु आर्थिक विषय को समझने में समय लगता है। अब यह देश प्रयोगों को सहने की स्थिति में नही है।

बेरोज़गारी 45 सालों में सबसे ज़्यादा हो गई है और आर्थिक वृद्धि दर में भारत चीन से पिछड़ गया है।

प्रधानमंत्री के पूर्व आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने जीडीपी आंकड़ों पर सवाल दाग कर आर्थिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

भारतीय बैंक कर्ज से घिरे हुए हैं नए उधार रोक दिये गए है, रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के अनुसार, भारत के भीतर, वाणिज्यिक पत्र के माध्यम से कॉर्पोरेट उधार पिछले दस वर्षों में दस गुना बढ़ गया है और उस खाते पर बकाया ऋण चौगुना हो गया है।

जेपी मॉर्गन एंड चेज के रणनीतिकारों का कहना है कि अगली मंदी 2020 में आ सकती है. निवेशकों को इसके लिए कमर कस लेनी चाहिए।

अमरीकन राष्ट्रपति ट्रंप ने 2020 की मंदी को भांपते हुए परम्परागत निर्णयों को देश हित मे कठोर निर्णय की कड़ी में भारत से आयात होने वाले सामानों पर आयात कर बढ़ा दिए है, भारत को भी तुरन्त अमरीकी सामानों पर कर लगाने थे परंतु 1 साल बाद आधा अधूरा कर लगाकर राहत की सांस ले ली, जो नाकाफी है।

छोटे व्यापार जीएसटी से बुरी तरह प्रभावित है उन्हें उससे निज़ात दिलानी चाहिये।

जिस प्रकार अमरीका ने भारत आयत कर लगाए है उसी प्रकार चीन पर आयात कर लगाने चाहिये क्योंकि अब समय मुक्त व्यापार का नही अपने व्यापार को संरक्षण देने की नीति का है।

मोदी सरकार को पुरानी नीति को तिलांजलि दे अब एकदम नयी आर्थिक नीति अपनानी होगी। आयत कर लगाने दे देश के छोटे और लघु उद्योगों में प्रतिस्पर्द्धा करने की ताक़त बढ़ेगी।

हमारे देश में जनसंख्या के अनुसार छोटे उधोग कारगर है जिससे रोज़गार बढ़ता है, बड़े उधोगों में तकनीकी के कारण सीमित रोज़गार के मौके होते है।

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